सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार से सवाल, जरूरी दवाओं का उत्पादन और वितरण क्यों नहीं हो पा रहा?

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सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में कोरोना संक्रमण मामले पर सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि जरूरी दवाओं का उत्पादन और वितरण सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा?

इस पर केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि हर महीने करीब 1 करोड़ तीन लाख रेमडेसिवीर उत्पादन करने की क्षमता है, लेकिन सरकार ने मांग और सप्लाई की जानकारी यहां पर नहीं दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र ने आवंटन का तरीका भी नहीं बताया है। केंद्र को डॉक्टरों से यह कहना चाहिए कि रेमडेसिविर या फेविफ्लू की बजाय अन्य उपयुक्त दवाएं भी मरीजों को बताएं, मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि आरटीपीसीआर से कोविड के नए रूप की पड़ताल नहीं हो पा रही है। इसमें भी अनुसंधान की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आप 18 से 45 साल के उम्र वालों को वैक्सीन लगाने की योजना बताएं। क्या केंद्र के पास कोई कोष भी है, जिससे वैक्सीन के दाम समान रखे जा सके? केंद्र सरकार को यह भी बताना होगा कि भारत बायोटेक और सीरम इंस्टिट्यूट को कितना फंड दिया है।

गरीब कहां से खरीदेंगे वैक्सीन?

कोर्ट ने कहा कि हम सिर्फ चैरिटी तक इसे नहीं छोड़ सकते हैं। वैक्सीन का मूल्य निर्धारण का मुद्दा असाधारण रूप से गंभीर है। आज आप कहते हैं कि केंद्र को प्रदान किए गए 50% वैक्सीन का उपयोग फ्रंटलाइन श्रमिकों और 45 से अधिक आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए किया जाएगा।

शेष 50% राज्यों द्वारा उपयोग किया जाएगा, 59.46 करोड़ भारतीय 45 साल से कम हैं, उनमें से कई गरीब और हाशिए पर हैं, उन्हें वैक्सीन खरीदने के लिए पैसे कहां से मिलेंगे?

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम जानते हैं कि कितने टीके का उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि आप उत्पादन में वृद्धि करें।