शिक्षा और ज्ञान से समाज का सशक्तिकरण संभव: डॉ निशंक

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डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आज यहाँ दिल्ली यूनिवर्सिटी के 97वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यूनिवर्सिटी के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताया और छात्रों से कहा कि इस इतिहास को बताने का मुख्य उद्देश्य यह है कि आप सभी इस इतिहास से सीख लेते हुए आगे बढ़ें, इसे संवारें और एक नया स्वर्णिम इतिहास लिखें. इसके अलावा उन्होनें कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी ने न सिर्फ ज्ञान सृजन में बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

इस अवसर पर संघ लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. पीके जोशी, दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.पी सी जोशी, कॉलेज के डीन प्रो. बलराम पाणि, दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस की डायरेक्टर प्रो. सुमन कुंदू, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. आज 670 छात्रों को डॉक्टोरल डिग्री, 44 को डीएम/एमसीएच डिग्री, 156 को मेडल व 36 छात्रों को पुरस्कार दिए गए.

सभी डिग्री एवं पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए माननीय मंत्री जी ने कहा कि मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि इस दीक्षांत समारोह में जिन विद्यार्थियों को डिग्री व पदक प्राप्त हो रहे हैं वह निश्चित ही विश्व पटल पर दिल्ली विश्वविद्यालय व भारत का नाम रौशन करेंगे.

दिल्ली यूनिवर्सिटी की राष्ट्र निर्माण में भूमिका के बारे में बात करते हुए डॉ निशंक ने कहा, “आज जब हम आज़ादी के 75 वर्ष एवं यूनिवर्सिटी अपने स्थापना के 100 वर्षों की यात्रा की ओर बढ़ रहा है तो मुझे लगता है की यूनिवर्सिटी की ऐतिहासिक प्रष्ठभूमी और आज़ादी की लड़ाई में योगदान को भी याद करना होगा. दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्थापना उस काल में हुई जब देश आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था. दिल्ली यूनिवर्सिटी और आज़ादी के इतिहास से जुड़ी सैंकड़ो ऐसी घटनाएँ है जिनका ज़िक्र यदा कदा होता रहता है.”

उन्होनें बताया कि देश जब आज़ाद नहीं हुआ था तब से इस कैंपस में सन् 1935 से “छात्र संसद” का प्रचलन है. यह संवाद की संस्कृति ही तो हमारी ताकत है. इस छात्र संसद ने गांधी, नेहरु, सरोजिनी नायडू, एनी बेसेंट और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसी शख्सियतों को तराशने में अहम् भूमिका निभाई है. डॉ निशंक ने कहा, “मुझे खुशी है कि पिछले 100 वर्षों में राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने ‘निष्ठा धृति सत्यम’ के अपने सिद्धांत को पूर्णता अपनी कैंपस संस्कृति में समाहित कर लिया है. मैं चाहता हूं कि आप इस लंबी यात्रा की समीक्षा करें ताकि आपको यह समझ आ सके कि आज आप कहां हैं? और भविष्य में आप कहां जाना चाहते हैं? इससे आपको अपने नए लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एक रोडमैप मिलेगा.”

इसके अलावा माननीय मंत्री जी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए अन्य कार्यों एवं कोरोना संकट काल के दौरान की गई पहलों के बारे में बात करते हुए कहा कि मुझे यह देख कर बहुत खुशी हुई कि विद्या विस्तार योजना के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित संस्थानों को सहयोग प्रदान कर रहा है.

इसके अलावा माननीय मंत्री जी ने कोरोना काल में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सबसे बड़े रिफार्म – नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति – के बारे में बात करते हुए कहा कि यह किसी सरकार या किसी व्यक्ति विशेष की नीति नहीं है बल्कि हमारी नीति है. हम सब मिलकर इस नीति को लेकर आए हैं और अब इस नीति का क्रियान्वयन भी हम सबका कर्तव्य है. यह मात्र एक नीति नहीं बल्कि भारत के स्वर्णिम भविष्य का विजन डॉक्यूमेंट है.

उन्होनें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में सबको विस्तार से बताया और इसके क्रियान्वयन के लिए सभी का आहवाहन करते हुए कहा कि जिस एनईपी क्रियान्वन टास्क फोर्स का गठन आपके द्वारा हुआ है वह एनईपी को सबसे पहले लागू करके दिखाएं व अन्य संस्थानों का मार्गदर्शन करें. आप देश की राजधानी दिल्ली में स्थित है जहां महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं. आप राष्ट्रीय नीतियों पर उत्कृष्टता केंद्र को आगे बढ़ा कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं. आपके प्रयासों से ना केवल भारतीय शिक्षा प्रणाली को बल मिलेगा अपितु भारत शिक्षा के क्षेत्र में पूरे विश्व का नेतृत्व करेगा.