‘राम’ की चुप्पी से छलका ‘हनुमान’ का दर्द, बोले- संकट में मुझे अकेला छोड़ दिया

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लोक जनशक्ति पार्टी से बीते दिनों चिराग पासवान को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। इसके बाद चिराग पासवान खुद को अकेले महसूस करने लगे। चिराग बुधवार को पीएम मोदी से मिलने की कोशिश की। इसी क्रम में उन्होंने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि जब ‘हनुमान’ की हत्या हो तो ‘राम’ का चुप रहना ठीक नहीं है।’

चिराग पासवान ने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर छोटे बड़े फैसले में साथ रही है। ऐसे मुश्किल वक्त में बीजेपी को हस्तक्षेप करना चाहिए, लेकिन उनकी चुप्पी ने मुझे दुखी किया है। उन्होंने कहा कि लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समस्या का हल जरूर निकलेंगे।

नीतीश कुमार पर लगाया आरोप

चिराग पासवान ने एलजेपी में इस टूट के लिए सीधे तौर पर नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि हर कोई जानता है कि इसके पीछे कौन है। कई मौकों पर उन्होंने पार्टी में विवाद पैदा करने की कोशिश की है।

चिराग ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके काम करने का तरीका ही यही है। उन्होंने कहा कि 2005 में जब हमारे 29 विधायक जीते थे, नीतीश कुमार ने हमारी पार्टी तोड़ी थी। यही काम 2020 मेंं भी किया। आखिर वो कैसे कह रहे हैं कि इसमें उनका कोई हाथ नहीं है।

नीतीश कुमार ने मेरे पिता को अपमानित किया

चिराग पासवान ने आगे कहा कि ‘गठबंधन सरकारें न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर चलती हैं। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं किसी ऐसे व्यक्ति के साथ कैसे जा सकता हूं जिसने मेरे पिता को अपमानित किया है, उन्हें बदनाम करने, हराने और नष्ट करने की कोशिश की है? यह पहली बार नहीं है जब वह मेरी पार्टी तोड़ रहे हैं। उन्होंने 2005 में ऐसा किया था।

निरंकुश होने के आरोपों को नकारा

चिराग पासवान ने अपने ऊपर निरंकुश होने के आरोपों का जबाव देते हुए कहा कि अगर मैं निरंकुश होता तो मुझे एलजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 66 सदस्यों का समर्थन नहीं मिलता। पांच सांसदों सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी के केवल नौ सदस्यों ने पार्टी छोड़ी। 135 उम्मीदवारों में से 114 ने मुझे समर्थन का खुला पत्र सौंपा है।