पीएम मोदी की मन की बात: जनधन खाते से लेकर यूपीआई ट्रांजेक्शन तक का जिक्र, जानें मुख्य बातें

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पीएम मोदी मन की बात

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम में मन की बात है 81वें संस्करण को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान जनधन खातों से लेकर यूपीआई ट्रांजैक्शन तक का जिक्र किया। अपने मन की बात में पीएम मोदी ने विश्व नदी दिवस पर भी चर्चा की और नदियों को साफ सुथरा रखने को लेकर कई बातें भी कहीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, डिजिटल पेमेंट से देश की अर्थव्यवस्था में स्वच्छता और पारदर्शिता आ रही है। अगस्त महीने में यूपीआई से 355 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। आज औसतन 600000 करोड़ रुपए से अधिक का डिजिटल पेमेंट यूपीआई से हो रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे आज के नौजवान को यह जरूर जाना चाहिए कि साफ सफाई के अभियान ने कैसे आजादी के आंदोलन को निरंतर ऊर्जा दी थी। यह महात्मा गांधी ही तो थे जिन्होंने स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने का काम किया था। महात्मा गांधी ने स्वच्छता को स्वाधीनता के सपने के साथ जोड़ दिया था।

अपने मन की बात के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बिहार में विशेष तौर पर मनाए जाने वाले छठ पूजा का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे नदियों की स्वच्छता के लिए बड़ा अफसर बताते हुए कहा कि कुछ दिनों में छठ के लिए नदियों की सफाई शुरू हो जाएगी। प्रधानमंत्री ने इस बार नदियों की स्वच्छता पर अपना विशेष फोकस रखा है। उन्होंने विश्व नदी दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि हम नदियों को मां कहते हैं और इनके लिए गीत गाते हैं तो यह सवाल उठता है कि यह नदियां प्रदूषित कैसे हो जाती है?

पीएम मोदी ने कहा कि नदियों का स्मरण करने की परंपरा आज भले ही लुप्त हो गई हो या कहीं बहुत अल्प मात्रा में बची हो लेकिन एक बहुत बड़ी परंपरा थी जो प्रातः में स्नान करते समय ही विशाल भारत की एक यात्रा करा देती थी, मानसिक यात्रा। ‌

उन्होंने कहा कि आजकल एक विशेष ई ऑक्शन चल रहा है। इसमें उन उपहारों की इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नीलामी हो रही है जो मुझे समय-समय पर लोगों ने दिए हैं। इस नीलामी से जो पैसा आएगा वह नमामि गंगे अभियान के लिए समर्पित किया जाता है। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने नदियों की सफाई में सबका सहयोग होने पर बल दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में नदियों में जरा सा प्रदूषण करने को भी गलत बताया गया है। हम नदियों की सफाई और उन्हें प्रदूषण से मुक्त करने का प्रयास सब के सहयोग से कर सकते हैं। नमामि गंगे मिशन आज आगे बढ़ रहा है तो इसमें सभी लोगों के प्रयास जन जागृति जन आंदोलन की बड़ी भूमिका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे लिए नदियां एक भौतिक वस्तु नहीं है। हमारे लिए नदी एक जीवंत इकाई है। हम नदियों को मां कहते हैं। हमारे कितने ही पर्व त्यौहार हूं उत्सव हैं यह सभी इन माताओं की गोद में ही होते हैं। भारत में स्नान करते समय एक श्लोक बोलने की परंपरा रही है। गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिंधु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिं कुरु।