रिसर्च में दावा: फोन में पहले से इंस्टॉल एप चुरा रहे हैं यूजर्स का डाटा, इसमें फेसबुक और गूगल भी शामिल है

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एंड्रॉयड यूजर्स डाटा प्राइवेसी

इंटरनेट और स्मार्टफोन के इस दौर में सबसे ज्यादा डर इस बात का है की डाटा कलेक्शन और उससे गलत इस्तेमाल का कैसे सुरक्षित इंतजाम किया जाए। यूजर्स की परमिशन के बिना उनका डाटा रखने के मामले में टेक कंपनियां पहले से जांच के घेरे में है। अब एक नई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि आपके फोन में फ्री इंस्टॉल एप जैसे फेसबुक गूगल और माइक्रोसॉफ्ट एप्स चुपके से यूजर्स के प्रमोशन के बिना ही उनका डाटा अपने पास स्टार्ट कर लेते हैं।

यह रिसर्च डबलिन के ट्रिनिटी कॉलेज में की गई है। यूजर्स के चुपचाप लिए गए डाटा में एप की स्क्रीन, वेब एक्टिविटी, फोन कॉल में बिताया गया समय, डिवाइस आईडेंटिफायर जैसे हार्डवेयर सीरियल नंबर तक शामिल होते हैं। यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग के 6 वैरीअंट डिवाइस सैमसंग, शाओमी, हुवावे और रियल मी हेडसेट को रखा है।

इसके अनुसार मिनिमम कॉन्फ़िगरेशन के साथ जब हैंडसेट इन एक्टिव होता है तो e/OS के अलावा सभी वेरिएंट में पर्याप्त मात्रा में थर्ड पार्टी को ट्रांसफर करते हैं। इसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक इंस्टॉल एप शामिल है। चुकी जो ऐप इंस्टॉल होते हैं उन्हें अनइनस्टॉल भी नहीं किया जा सकता है।

रिसर्च में बताया गया है कि हार्डवेयर कंपनी का स्मार्टफोन सभी ऐप स्क्रीन की डिटेल हैंडसेट बनाने वाली कंपनी को भेजता है। इस में इस बात का उल्लेख होता है कि प्रत्येक ऐप का इस्तेमाल कब और कितनी देर तक किया गया है। यह एक तरह से कुकीज के जैसा ही है जो वेबपेज के बीच लोगों की एक्टिविटी को ट्रैक करता है।

रिसर्च में पाया गया है कि यह डाटा सिंगापुर और यूरोप के बाहर भेजा जाता है। रिसर्च के अनुसार हुवावे हैंडसेट पर स्विफ्ट कीबोर्ड खास तौर पर माइक्रोसॉफ्ट ऐप के इस्तेमाल की डिटेल भेजता है। इसमें यूजर टेक्स्ट लिखने, सर्च बार में टाइप करने और कांटेक्ट सर्च करने जैसे जानकारी होती है।

वही सैमसंग, शाओमी, रियल मी और गूगल हार्डवेयर डिवाइस आइडेंटी फायर जैसे सीरियल नंबर डाटा स्टोर किया जाता है। रिसर्च में इस बात का अंदेशा जताया गया है कि इस तरह का इको सिस्टम भी हो सकता है जिसमें फोन से डाटा को अलग-अलग कंपनियों को भेजा जाता है।